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यौन संचारित रोग (à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€) कà¥à¤¯à¤¾ हैं?
à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ का फà¥à¤² फॉरà¥à¤® होता है सेकà¥à¤¸à¥à¤…ली टà¥à¤°à¤¾à¤‚समिटेड डिजीज। ये à¤à¤¸à¥‡ संकà¥à¤°à¤®à¤£ हैं जो आमतौर पर सेकà¥à¤¸ से फैलते हैं, विशेष रूप से योनि संà¤à¥‹à¤—, गà¥à¤¦à¤¾ मैथà¥à¤¨(à¤à¤¨à¤² सेकà¥à¤¸) या मà¥à¤– मैथà¥à¤¨(ओरल सेकà¥à¤¸)। तीस से अधिक विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार के बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾, वायरस और परजीवी à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤†à¤ˆ का कारण बन सकते हैं।
à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ के पà¥à¤°à¤•ार:
यौन संचारित रोगों में शामिल हैं:
कà¥à¤²à¥ˆà¤®à¤¾à¤‡à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾
शैंकà¥à¤°à¥‰à¤‡à¤¡
जेनिटल हरà¥à¤ªà¤¿à¤¸
जननांग मसà¥à¤¸à¤¾
हेपेटाइटिस बी
à¤à¤šà¤†à¤ˆà¤µà¥€
à¤à¤šà¤ªà¥€à¤µà¥€ (मानव पेपिलोमावायरस)
टà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤•ोमोनिà¤à¤¸à¤¿à¤¸
सिफलिस(उपदंश)
सूजाक(गोनोरिया)
पेलà¥à¤µà¤¿à¤• इंफà¥à¤²à¥‡à¤®à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ डिजीज (पीआईडी)
4 नठà¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ कà¥à¤¯à¤¾ हैं?
हांलाकि 30 से अधिक यौन संचारित रोग हैं, आमतौर पर संचरित रोग उपदंश, कà¥à¤²à¥ˆà¤®à¤¾à¤‡à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾, सूजाक होते हैं। नठà¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ माइकोपà¥à¤²à¤¾à¤œà¥à¤®à¤¾ जेनिटेलियम, निसेरिया मेनिंगिटाइडà¥à¤¸, शिगेला फà¥à¤²à¥‡à¤•à¥à¤¸à¤¨à¥‡à¤°à¥€ और लिमà¥à¤«à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤¨à¥à¤²à¥‹à¤®à¤¾ वेंडर उम के मामलों में वृदà¥à¤§à¤¿ देखी जा रही है और à¤à¤‚टीबायोटिक पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§ की वृदà¥à¤§à¤¿ हà¥à¤ˆ है।
कौन सा à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ जीवन à¤à¤° आपके साथ रहता है?
यौन संचारित रोग बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾, कवक या वायरल संकà¥à¤°à¤®à¤£ के कारण हो सकते हैं। आजकल, अधिकांश à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ में इलाज काफी संà¤à¤µ है लेकिन उनमें से कà¥à¤› अà¤à¥€ à¤à¥€ à¤à¤¸à¥‡ हैं जिनका इलाज नहीं है और वे जीवन à¤à¤° रहते हैं। उन à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ में à¤à¤šà¤†à¤ˆà¤µà¥€ सिंडà¥à¤°à¥‹à¤®, हेपेटाइटिस बी, जननांग दाद, मानव पेपिलोमावायरस संकà¥à¤°à¤®à¤£ और साइटोमेगालोवायरस संकà¥à¤°à¤®à¤£ शामिल हैं।
à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ के लकà¥à¤·à¤£ कà¥à¤¯à¤¾ हैं?
सà¤à¥€ à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ लकà¥à¤·à¤£ नहीं दिखाते हैं इसलिठउपचार में कà¤à¥€-कà¤à¥€ देरी हो सकती है। लेकिन कà¥à¤› संकà¥à¤°à¤®à¤£ कà¥à¤› लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के साथ आते हैं:
पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ के लकà¥à¤·à¤£:
पेनाइल डिसà¥à¤šà¤¾à¤°à¥à¤œ
दरà¥à¤¦à¤¨à¤¾à¤• इंटर कोरà¥à¤¸
पेशाब के दौरान जलन महसूस होना
लगातार पेशाब आना
लिंग के आसपास दरà¥à¤¦ रहित घाव
महिलाओं में à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ के लकà¥à¤·à¤£:
असामानà¥à¤¯ योनि रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤¾à¤µ
सफेद योनि या दरà¥à¤¦à¤¨à¤¾à¤• इंटरकोरà¥à¤¸
पेशाब के दौरान जलन महसूस होना
लगातार पेशाब आना
योनि के आसपास दरà¥à¤¦ रहित घाव
दà¥à¤°à¥à¤—ंध के साथ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हरा डिसà¥à¤šà¤¾à¤°à¥à¤œ
योनि में खà¥à¤œà¤²à¥€ या योनि के आसपास जलन
à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ का निदान कैसे करें?
यदि आप à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ के किसी à¤à¥€ लकà¥à¤·à¤£ का अनà¥à¤à¤µ करते हैं, तो आपके जांच के लिठकई घरेलू परीकà¥à¤·à¤£ किट उपलबà¥à¤§ हैं। केवल उन पर à¤à¤°à¥‹à¤¸à¤¾ न करें कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वे हमेशा विशà¥à¤µà¤¸à¤¨à¥€à¤¯ नहीं हो सकते हैं।
पैप सà¥à¤®à¥€à¤¯à¤° टेसà¥à¤Ÿ के साथ नियमित जांच से पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• चरण के à¤à¤šà¤ªà¥€à¤µà¥€ के अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है या पता लगाया जा सकता है जिससे सरà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤•ल कैंसर होता है। हमेशा याद रखें कि डॉकà¥à¤Ÿà¤° के कà¥à¤²à¤¿à¤¨à¤¿à¤• या असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ की जांच कराà¤à¤‚। सिरà¥à¤« होम टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤‚ग किट पर निरà¥à¤à¤° न रहें।
कà¥à¤¯à¤¾ आप टॉयलेट सीट से à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर सकते हैं?
à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ आमतौर पर यौन गतिविधियों के दौरान पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ होते हैं। यह मौखिक, योनि, गà¥à¤¦à¤¾ मैथà¥à¤¨ और तà¥à¤µà¤šà¤¾ से तà¥à¤µà¤šà¤¾ के निकट संपरà¥à¤• के दौरान पà¥à¤°à¥‡à¤·à¤¿à¤¤ किया जा सकता है। यौन गतिविधियों के अà¤à¤¾à¤µ में à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ के संचरण की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ धूमिल है। हालाà¤à¤•ि, संचरण सैदà¥à¤§à¤¾à¤‚तिक रूप से हो सकता है।
à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ का इलाज कैसे किया जाता है?
कà¥à¤²à¥ˆà¤®à¤¾à¤‡à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾: कà¥à¤²à¥ˆà¤®à¤¾à¤‡à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾ वाले वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को à¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं की à¤à¤•ल खà¥à¤°à¤¾à¤• के बाद सात दिनों तक या à¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं के सात दिन के पाठà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® के पूरा होने तक सेकà¥à¤¸ से दूर रहना चाहिà¤à¥¤
जननांग दाद: इसे ठीक नहीं किया जा सकता है लेकिन दवाओं से नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ किया जा सकता है।
à¤à¤šà¤ªà¥€à¤µà¥€: इसे ठीक नहीं किया जा सकता है लेकिन टीकों से रोका जा सकता है और दवाओं से नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ किया जा सकता है।
उपदंश: यदि पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• अवसà¥à¤¥à¤¾ में पहचाना जाता है, आमतौर पर संकà¥à¤°à¤®à¤£ के à¤à¤• वरà¥à¤· के à¤à¥€à¤¤à¤° à¤à¤‚टीबायोटिक के à¤à¤• इंजेकà¥à¤¶à¤¨ के साथ इसका इलाज किया जा सकता है। यदि पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• अवसà¥à¤¥à¤¾ में इसकी पहचान नहीं की जा सकती है, तो उपदंश को à¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं के साथ लंबी अवधि के उपचार की आवशà¥à¤¯à¤•ता हो सकती है।
टà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤•ोमोनिà¤à¤¸à¤¿à¤¸: इसका इलाज à¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं की à¤à¤• खà¥à¤°à¤¾à¤• से किया जा सकता है, आमतौर पर या तो मेटà¥à¤°à¥‹à¤¨à¤¿à¤¡à¤¾à¤œà¥‹à¤² या टिनिडाज़ोल, मà¥à¤‚ह से लिया जाता है।
हेपेटाइटिस बी: इसका इलाज à¤à¤‚टीवायरल दवाओं से किया जा सकता है और टीकाकरण से इसे रोका जा सकता है।
गोनोरिया: इसका इलाज à¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं से किया जा सकता है।
à¤à¤šà¤†à¤ˆà¤µà¥€/à¤à¤¡à¥à¤¸: जिन लोगों को à¤à¤šà¤†à¤ˆà¤µà¥€ संकà¥à¤°à¤®à¤£ का अधिक खतरा हो सकता है वे à¤à¤šà¤†à¤ˆà¤µà¥€ पà¥à¤°à¥€-à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¥‹à¤œà¤° पà¥à¤°à¥‹à¤«à¤¿à¤²à¥ˆà¤•à¥à¤¸à¤¿à¤¸ या पीईईपी पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर सकते हैं जिसमें à¤à¤šà¤†à¤ˆà¤µà¥€ दवा शामिल है जिसे टà¥à¤°à¥à¤µà¤¾à¤¡à¤¾(Truvada) के नाम से जाना जाता है और à¤à¤šà¤†à¤ˆà¤µà¥€ को रोकने के लिठइसे लगातार लेना चाहिà¤à¥¤ à¤à¤šà¤†à¤ˆà¤µà¥€ से पीड़ित लोगों में à¤à¤‚टीरेटà¥à¤°à¥‹à¤µà¤¾à¤¯à¤°à¤² थेरेपी की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ करके à¤à¤¡à¥à¤¸ को रोका जा सकता है।
इनमें से कà¥à¤› बीमारियों का इलाज à¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं जैसे à¤à¤œà¤¿à¤¥à¥à¤°à¥‹à¤®à¤¾à¤‡à¤¸à¤¿à¤¨, सेफिकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤® और मेटà¥à¤°à¥‹à¤¨à¤¿à¤¡à¤¾à¤œà¥‹à¤² से किया जा सकता है। उपचार इनमें से अधिकांश संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ और पà¥à¤°à¤—ति को कम कर सकते हैं।
कौन से à¤à¤‚टीबायोटिकà¥à¤¸ यौन संचारित रोगों का इलाज करते हैं?
यौन संचारित रोगों का इलाज कà¥à¤› à¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं के उपयोग से किया जा सकता है जैसे कि गोनोरिया के मामले में, तीसरी पीढ़ी के à¤à¤‚टीबायोटिक जैसे सीफà¥à¤°à¥€à¤…कà¥à¤¸à¥‹à¤¨ को पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤•ता दी जाती है, जबकि कà¥à¤²à¥ˆà¤®à¤¾à¤‡à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾ के मामले में, à¤à¤œà¤¼à¤¿à¤¥à¥à¤°à¥‹à¤®à¤¾à¤‡à¤¸à¤¿à¤¨ जैसे à¤à¤‚टीबायोटिकà¥à¤¸ बीमारी के इलाज के लिठउपयà¥à¤•à¥à¤¤ हैं। यदि किसी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को सेफà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤à¤•à¥à¤¸à¥‹à¤¨ से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है, तो मौखिक या इंजेकà¥à¤¶à¤¨ योगà¥à¤¯ जेंटामाइसिन के साथ मौखिक à¤à¤œà¤¼à¤¿à¤¥à¥à¤°à¥‹à¤®à¤¾à¤‡à¤¸à¤¿à¤¨ का संयोजन काम कर सकता है।
कà¥à¤¯à¤¾ à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है?
à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ या वायरस के कारण हो सकता है। यदि जीवाणॠरोग उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ करने वाले कारक हैं, तो रोग के शà¥à¤°à¥‚आती चरण में शà¥à¤°à¥‚ किठजाने पर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं से ठीक किया जा सकता है। वायरस के कारण होने वाले à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ को केवल रोगसूचक राहत देने के लिठपà¥à¤°à¤¬à¤‚धित किया जा सकता है। हेपेटाइटिस बी के खिलाफ टीका उपलबà¥à¤§ है लेकिन यह हेपेटाइटिस बी से तà¤à¥€ बचाव कर सकता है जब संकà¥à¤°à¤®à¤£ से पहले अचà¥à¤›à¥€ तरह से दिया जाà¤à¥¤
कà¥à¤¯à¤¾ à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ उपचार के कोई दà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ हैं?
यौन संचारित रोगों के उपचार या नियंतà¥à¤°à¤£ के लिठदवाओं के कà¥à¤› दà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ हो सकते हैं जैसे कि à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾, तà¥à¤µà¤šà¤¾ में खà¥à¤œà¤²à¥€, लालिमा और सूजन। कà¥à¤› पà¥à¤°à¤•ार के रोगाणॠकैंसर के विकास का कारण à¤à¥€ बन सकते हैं। कà¥à¤› वायरल संकà¥à¤°à¤®à¤£ जैसे हेपेटाइटिस बी और à¤à¤šà¤†à¤ˆà¤µà¥€ गंà¤à¥€à¤° बीमारी का कारण बन सकते हैं और इसके परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प मृतà¥à¤¯à¥ à¤à¥€ हो सकती है। कà¥à¤²à¥ˆà¤®à¤¾à¤‡à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾ के लिठदवाà¤à¤‚ मतली और उलà¥à¤Ÿà¥€, पेट दरà¥à¤¦ या à¤à¤‚ठन, योनि में खà¥à¤œà¤²à¥€ या डिसà¥à¤šà¤¾à¤°à¥à¤œ का कारण बन सकती हैं।
à¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं के उपचार के बाद, उपदंश से पीड़ित रोगी को बà¥à¤–ार, सिरदरà¥à¤¦, जोड़ों या मांसपेशियों में दरà¥à¤¦ और मतली और ठंड लगना का अनà¥à¤à¤µ हो सकता है। à¤à¤šà¤†à¤ˆà¤µà¥€ दवा के दà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ हैं- अतिसंवेदनशीलता पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾, à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾, दसà¥à¤¤, पेट में दरà¥à¤¦, नà¥à¤¯à¥‚रोपैथी, दाने, अनिदà¥à¤°à¤¾, थकान, à¤à¥‚ख न लगना आदि। इसी तरह अनà¥à¤¯ à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ के लिठकई अनà¥à¤¯ दवाओं के दà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ हो सकते हैं।
यौन संचारित रोग के उपचार के बाद दिशानिरà¥à¤¦à¥‡à¤¶ कà¥à¤¯à¤¾ हैं?
à¤à¤²à¥‡ ही उपचार के दौरान लकà¥à¤·à¤£ दूर हो जाà¤à¤‚, रोगियों को दवा का कोरà¥à¤¸ जारी रखना चाहिà¤à¥¤ डॉकà¥à¤Ÿà¤° आमतौर पर यह सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करने के लिठबà¥à¤²à¤¡ टेसà¥à¤Ÿ लिखेंगे कि मरीज पर दी गई दवाओं का असर हो रहा हैं। जरूरत पड़ने पर सेकà¥à¤¸ पारà¥à¤Ÿà¤¨à¤° का à¤à¥€ टेसà¥à¤Ÿ करवाना चाहिà¤à¥¤
असà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ यौन संबंध से बचने और संà¤à¥‹à¤— के दौरान कंडोम का उपयोग करने का सà¥à¤à¤¾à¤µ दिया जाता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को बीमारी से फिर से संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ होने का मौका मिलता है। कà¥à¤› संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ के लिà¤, यौन संचारित रोगों के लिठनियमित रूप से परीकà¥à¤·à¤£ करवाने का सà¥à¤à¤¾à¤µ दिया जाता है।
कà¥à¤¯à¤¾ à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ ठीक हो सकता है?
कई à¤à¤¸à¤Ÿà¥€à¤¡à¥€ à¤à¤‚टीबायोटिकà¥à¤¸ या अनà¥à¤¯ उपचारों से ठीक हो सकते हैं:
टà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤•ोमोनिà¤à¤¸à¤¿à¤¸
उपदंश
सूजाक
कà¥à¤²à¥ˆà¤®à¤¾à¤‡à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾
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